गाजियाबाद। वरिष्ठ नागरिक पेंशनर्स सेवा संस्थान (उत्तर प्रदेश) की जनपद शाखा ने ‘पेंशनर दिवस’ के अवसर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में अपनी समस्याओं को पुरजोर तरीके से उठाया। संस्थान के अध्यक्ष राकेश शर्मा और जिला सचिव राजकुमार सिंह के नेतृत्व में प्रशासन को एक 22-सूत्रीय मांग पत्र सौंपा गया, जिसमें चिकित्सा प्रतिपूर्ति, आयकर कटौती और कैशलेस चिकित्सा सुविधाओं में व्याप्त जटिलताओं के समाधान की पुरजोर मांग की गई। पेंशनर्स ने स्पष्ट किया कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों का सम्मान और उनकी सुविधाओं का समयबद्ध निस्तारण शासन की प्राथमिकता होनी चाहिए, जिसमें वर्तमान में कई विसंगतियां बनी हुई हैं।
मांग पत्र में विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवाओं और निजी अस्पतालों की मनमानी पर कड़ा रुख अपनाया गया है। संस्थान ने आरोप लगाया कि चिकित्सा प्रतिपूर्ति नियमावली के बावजूद बिलों के भुगतान में ‘हीलाहवाली’ की जा रही है, जिसके लिए “प्रथम आवत-प्रथम पावत” नीति के तहत रजिस्टर बनाए जाने की मांग की गई। वहीं, पंडित दीनदयाल उपाध्याय कैशलेस योजना के तहत सूचीबद्ध निजी अस्पतालों द्वारा इलाज से इनकार करने पर उनकी आबद्धता (पैनल) समाप्त करने का सुझाव दिया गया। साथ ही, वरिष्ठ नागरिकों ने विकास भवन में प्रतिमाह तीन दिवसीय विशेष कैंप लगाकर हेल्थ कार्ड जारी करने की प्रक्रिया को गति देने की अपील की।
प्रशासनिक जवाबदेही और बैंकिंग सुविधाओं पर ध्यान आकर्षित करते हुए संस्थान ने आयकर अधिनियम के विरुद्ध हो रही ‘मनमानी’ कटौती को रोकने और बैंकों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग काउंटर सुनिश्चित करने की मांग की। कोषागार स्तर पर डिजिटल सुधारों पर जोर देते हुए मांग की गई कि जीवित प्रमाण पत्र जमा करने से पूर्व एसएमएस द्वारा सूचना दी जाए और 2016 से पूर्व के लंबित पेंशन पुनरीक्षण कार्यों को बिना आवेदन की प्रतीक्षा किए तुरंत पूरा किया जाए। जिला सचिव राजकुमार सिंह ने मांग की कि बैठक की कार्यवाही में अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए और जिलाधिकारी की अध्यक्षता में नियमित त्रैमासिक बैठकें आयोजित हों ताकि इन मांगों पर जमीनी अमल सुनिश्चित हो सके।
