गुटबाजी और प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ा ‘पेंशनर दिवस’, वरिष्ठ नागरिकों में भारी रोष

मुजफ्फरनगर। जनपद में आयोजित ‘पेंशनर दिवस’ प्रशासन की बेरुखी और आयोजकों की आपसी खींचतान के कारण पूरी तरह विफल साबित हुआ। वरिष्ठ नागरिक पेंशनर्स सेवा संस्थान के उद्देश्यों को ताक पर रखकर आयोजित इस बैठक से जिलाधिकारी समेत प्रशासन का कोई भी बड़ा प्रतिनिधि नदारद रहा, जिससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों में गहरा असंतोष है। कार्यक्रम के दौरान अव्यवस्था तब और बढ़ गई जब किसान यूनियन के सदस्यों के अचानक प्रवेश से सभा में खलबली मच गई। स्थानीय नेतृत्व, विशेषकर संयोजक बी.आर. शर्मा और डी.पी. जैन पर ‘वन मैन शो’ चलाने और अन्य घटक संघों से समन्वय न करने के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि इस आपसी गुटबाजी के कारण अन्य संगठनों को अपना मांग पत्र तक प्रस्तुत नहीं करने दिया गया, जिससे पेंशनरों की सामूहिक आवाज दबकर रह गई।

भारी हंगामे और कुप्रबंधन के बीच केवल ‘वरिष्ठ नागरिक एवं पेंशनर्स सेवा संस्थान’ ही एकमात्र संगठन रहा जिसने मुख्य कोषाधिकारी को अपना ज्ञापन सौंपा। संस्थान ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय योजना की विसंगतियों और चिकित्सा नियमावली 2011 में सुधार जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रभावी ढंग से अपनी बात रखी। वहीं दूसरी ओर, स्थानीय नेतृत्व की मनमानी से आक्रोशित पेंशनर्स ने अब प्रदेश नेतृत्व और महामंत्री श्री दुबे जी से हस्तक्षेप की मांग की है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों का कहना है कि स्वास्थ्य कार्ड, आयकर कटौती और पेंशन पुनरीक्षण जैसी गंभीर समस्याओं का समाधान तभी संभव है जब व्यक्तिगत हितों को छोड़कर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गरिमापूर्ण बैठक सुनिश्चित की जाए।

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