प्रयागराज। संगम नगरी में वर्षों बाद आयोजित ‘पेंशनर दिवस’ सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए नई उम्मीदें और सम्मान लेकर आया। जिलाधिकारी मनीष वर्मा की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस बैठक में प्रशासन का एक मानवीय और बेहद सक्रिय चेहरा देखने को मिला, जहाँ उन्होंने पेंशनरों के उन ज्वलंत मुद्दों को स्वयं उठाया जिन्हें लेकर वे लंबे समय से परेशान थे। विशेष रूप से सीएमओ कार्यालय में चिकित्सा प्रतिपूर्ति (Medical Reimbursement) के बिलों में हो रही 6-6 महीने की देरी और बेसिक शिक्षा विभाग की पेंशन विसंगतियों पर जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी (CDO) को इन प्रकरणों को समयबद्ध तरीके से निस्तारित करने का सीधा निर्देश देते हुए स्पष्ट किया कि वरिष्ठ नागरिकों के कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता क्षम्य नहीं होगी। डीएम के इस सकारात्मक रुख को देख उपस्थित सैकड़ों पेंशनरों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका अभिनंदन किया।
इस आयोजन की सबसे बड़ी उपलब्धि जिलाधिकारी द्वारा की गई वह अभूतपूर्व घोषणा रही, जिसने पेंशनरों और प्रशासन के बीच संवाद की नई इबारत लिख दी है। जिलाधिकारी ने निर्णय लिया कि अब पेंशनरों की शिकायतों के लिए साल में केवल एक दिन का इंतजार नहीं करना होगा, बल्कि प्रत्येक माह एक निश्चित तिथि पर वे स्वयं उपस्थित रहकर जनसुनवाई करेंगे और विभागों के साथ लंबित कार्यों का अनुश्रवण करेंगे। पेंशनर्स सेवा संस्थान (उत्तर प्रदेश) के अध्यक्ष हिन्द राज सिंह, मंत्री चन्द्र प्रकाश तिवारी और संरक्षक हरि श्याम सिंह चन्देल सहित अन्य पदाधिकारियों ने इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इससे न केवल समस्याओं का त्वरित निस्तारण होगा, बल्कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों का सम्मान भी सुरक्षित रहेगा।