प्रदेशव्यापी आंदोलन और एकजुटता का आह्वान
प्रदेश के 12 लाख पेंशनर्स/कर्मचारियों में सरकार के प्रति बढ़ती जा रही नाराजगी
महोबा। आठवें वेतन आयोग में टर्म्स आफ रिफरेन्स में पेंशनरों के साथ दोहरा मापदण्ड अपनाने सहित शासन स्तर पर पेंशनर संगठनों की निरंतर उपेक्षा के फलस्वरूप पेंशनरों को मजबूर होकर आन्दोलन हेतु विवश होना पडता है शासन स्तर पर विगत दो वर्षों से प्रदेश पेंशन संगठनों की लगातार उपेक्षा हो रही है पेशंनर सगंठनो द्धारा बार बार अनुरोध करने के बाद भी पदाधिकारियों के सचिवालय प्रवेश पत्र पर जारी नही किये जा रहै है। विभिन्न पेंशनर संगठनों के नेतृत्वकर्ता अपनी जुगाड़ से सचिवालय प्रवेश पत्र भले ही बनवा लिए हो, लेकिन विगत दो वर्षों से प्रमुख सचिव वित्त के स्तर से व्यवहरित होने वाले किसी भी संगठन के पदाधिकारी का प्रवेश पत्र बनाने की संस्तुति प्रमुख सचिव कार्मिक को नहीं किया है। इसका सीधा अर्थ यह है कि शासन स्तर पर पेंशनर संगठनों के संविधान प्रदत्त प्रजातांत्रिक अधिकार को नकारा जा रहा है। इस तथ्य को कई बार मुख्य सचिव एवं माननीय मुख्यमंत्री जी के संज्ञान में लाया गया, परंतु किसी भी स्तर से कोई कार्यवाही नहीं हुई। मतलब साफ है कि मुख्य सचिव एवं यहां तक कि माननीय मुख्यमंत्री जी ने भी प्रजातंत्र में संवाद बनाए रखने के अधिकार के विपरीत संवाद हीनता बनाए रखने विश्वास किया जारहा है प्रमुख सचिव बित्त ने तो पेंशन सलाहकार सिमित की बैठक बुलाना भी उचित नही समक्षा गया। के जिसका असर प्रदेश के लाखों पेशंरो पर पड़ा है। संगठनों के पदाधिकारियों द्वारा पेशंनरो की समस्याएं मुख्य सचिव एवं प्रमुख सचिव कार्मिक प्रमुख सचिव वित्त के स्तर पर लाकर उनका निराकरण कराने का प्रयास किया जाता रहा है, लेकिन पेंशनर संगठनों के साथ संवाद स्थापित नहीं करने के अघोषित अलोकतांत्रिक निर्णय के कारण मुख्य सचिव एवं प्रमुख सचिव कार्मिक प्रमुख सचिव वित्त को जो भी समस्याएं संगठनों द्वारा पत्रों के माध्यम से भेजी जा रही है उन पर कार्यवाही नहीं हो रही है। इसका सीधा तात्पर्य है कि सरकार और पेशंनरो के बीच दूरियां बढ़ रही है ? पेशंनर प्रजातंत्र की रीढ़ समझा जाता है ऐसे में पेशंनरांे की समस्याओं पर वार्ता ना करना, उनका निराकरण न करना और बैठक के लिए समय नहीं दिए जाने से पेंशनरों में सरकार की गुड गवर्नेंस के प्रति लगातार नकारात्मक संदेश प्रसारित किया जा रहा है, जिसके कारण आने वाले आम चुनाव में पेंशनरों की नाराजगी मे दिखाई पड़ सकती है। माननीय मुख्यमंत्री जी को भी लगातार इस संबंध में अवगत कराया जा रहा है, परंतु माननीय मुख्यमंत्री जी के स्तर से भी पेशंनर संगठनों से मिलने का समय ना दिए जाने से समस्याएं गंभीर होती चली जा रही है। प्रदेश के 12 लाख पेंशनर्स/कर्मचारियों में सरकार से नाराजगी बढ़ती जा रही है। शायद यह मान लिया गया है कि पेशंनर के पास वोट की शक्ति नहीं है इसलिए पेंशनर को महत्व नहीं दिया जा रहा है। प्रशासनिक सिस्टम ऐसा इसलिए कर रहा है ताकि कर्मचारी मौजूदा सत्ता से नाराज होकर उनके खिलाफ मजबूती के साथ खड़ा हो जाए।काफी हद तक प्रशासनिक अधिकारियों का सिस्टम इसमें सफल भी है। आने वाले आम चुनाव में यह स्पष्ट हो जाएगा की 12 लाख पेशंनर/कर्मचारी एवं उनसे जुड़े कुल 02 करोड़ 90 लाख मतदाताओं की नाराजगी चुनाव में दिखाई पड़ेगी। प्रदेश के मुख्यमंत्री जी निश्चित रूप से ईमानदारी की भावना के साथ कार्य कर रहे हैं। कर्मचारियों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील भी है, परंतु उनके द्वारा लिए गए निर्णय को भी प्रशासनिक स्तर पर तोड़ मरोड़ कर लागू किया जा रहा है अथवा उसमें इतना अधिक विलंब किया जा रहा है जिसके कारण समस्या के समाधान का कोई लाभ सरकार को नहीं मिल रहा । मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद भी बेसिक शिक्षा परिषद के सेवानिवृत्त शिक्षकों को चिकित्सा सुविधा से वंचित कर दिया। वरिष्ठ नागरिक पेंशनर्स सेवा सस्थांन उ0प्र0 के महामंत्री बी0 के0 तिवारी ने बताया कि पेंशनर/कर्मचारी संगठनों के साथ मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव कार्मिक प्रमुख सचिव बित्त के साथ संवाद हीनता बनाए रखा जाना इस बात के पुख्ता प्रमाण है कि पेशंनरों/कर्मचारियों की उपेक्षा इस हद तक की जा रही है कि प्रदेश का पेंशनर/कर्मचारी सरकार के खिलाफ खड़ा हो जाए। श्री तिवारी ने माननीय मुख्यमंत्री जी का ध्यान आकर्षित करते हुए मागं की है कृपया उपरोक्त परिस्थितियों का अवलोकन कर वार्ता हेतु समय प्रदान करे है।
श्री तिवारी ने प्रदेश के सभी पेंशनरों से आह्वाहन किया कि वह एक जुट होकर एक ताकत के रूप में 25 मार्च को जिला मुख्यालय पर एकत्रित होकर काला दिवस मना कर प्रधानमंत्री को सम्बोधित ज्ञापन जिलाधिकारियों के माध्यम से देकर कार्यक्रम सफल बनाये और आने वाले समय में अपनी पहचान बनाने की दिशा में मजबूती के साथ आगे बढ़ें। हम सभी मिलकर संकल्पित होकर हर परिस्थिति में शत प्रतिशत मतदान करेंगे और पेंशनरों/कर्मचारियों के दुख दर्द और संवेदना को समझने वाले के साथ अपने विचार साझा करेंगे एवं सहयोग करेंगे।