महोबा: उत्तर प्रदेश के महोबा जनपद में क्रेशर उद्योग और निर्माण एजेंसियों द्वारा अनियमित और अत्यधिक विस्फोटक सामग्री के उपयोग से गंभीर पर्यावरणीय समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। खासकर, नेशनल हाईवे कानपुर-सागर मार्ग और आसपास के गांवों जैसे डहर्रा, गंज, बीलादक्षिण, पहरा, गुगौरा, अलीपुरा, पसवारा में यह समस्या अधिक गंभीर हो गई है।
इस अनियमित ब्लास्टिंग के कारण न केवल स्थानीय बस्तियों के लोग बीमारियों का शिकार हो रहे हैं, बल्कि दुर्घटनाओं की दर भी तेजी से बढ़ रही है, जिससे लोगों की जान को खतरा हो रहा है। एक गंभीर मामला यह सामने आया है कि कानपुर-सागर हाईवे से महज 300 मीटर की दूरी पर ब्लास्टिंग की जा रही है, जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई घंटों तक जाम की स्थिति बन जाती है। इस जाम के कारण झांसी मेडिकल कॉलेज में रेफर किए गए गंभीर मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा प्राप्त नहीं हो पा रही है, जिससे उनके जीवन को खतरा हो सकता है।
इसके अतिरिक्त, अनियंत्रित ब्लास्टिंग के कारण भारी कम्पन्न उत्पन्न हो रहा है, जिससे आसपास के इलाकों में भू-स्खलन जैसी घटनाएं हो रही हैं। किसानों की भूमि और बोरवेल भी प्रभावित हो रहे हैं और जल स्रोत सूखने से क्षेत्र में जल संकट उत्पन्न हो रहा है। इस स्थिति का कोई निर्धारित समय-सारणी नहीं है, जिससे नागरिकों, खासकर बच्चों और वृद्धों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
उल्लेखनीय है कि इस ब्लास्टिंग में निर्धारित मात्रा से अधिक विस्फोटक सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, जिससे ग्राउंड वाइब्रेशन और भूमिगत कंपन अत्यधिक हो रहे हैं। माइन सेफ्टी के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है और विस्फोटक स्थलों की निगरानी के लिए कोई तकनीकी टीम तैनात नहीं की गई है। इसके अलावा, वन अधिनियम, 1908 की धारा 7 का उल्लंधन किया जारहा है साथ ही सार्वजनिक सड़क, बिजली लाइनों, अस्पतालों, स्कूलों और कृषि भूमि के निकट विस्फोटक का प्रयोग किया जा रहा है, जो पूरी तरह से प्रतिबंधित है।

इन गंभीर समस्याओं को ध्यान में रखते हुए, बरिष्ठ नागरिक पेशनर सेवा सस्ंथान के महामंत्री बी के तिवारी ने एन जी टी के मुख्यन्यायाधीश दिल्ली एवं पृदूषण बोडँ यू पी ससहितमुख्य बिस्फौटक नियञकं नागपुर को पञ भेजकर कायँवाही की मागं की है.स्थानीय नागरिकों ने भी प्रशासन से अनुरोध किया है कि कबरई कस्बे सहित कानपुर-सागर राष्ट्रीय राजमार्ग पर अविलंब अनियंत्रित ब्लास्टिंग को रोका जाए। इसके साथ ही, विस्फोटकों की निगरानी सुनिश्चित की जाए और सुरक्षा मानकों के अनुरूप कदम उठाए जाएं। दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए भी तत्काल कार्रवाई की जाए.
